पैसा देने के बाद भी नहीं मिला वैध बिजली कनेक्शन, सेमरिया विद्युत वितरण केंद्र पर गंभीर आरोप
MP NEWS UPDATE JOURNALIST SURAJ KEWAT
सीधी। सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क के आधार पर उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने के दावों के बीच सेमरिया विद्युत वितरण केंद्र से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। नवीन बिजली कनेक्शन के नाम पर राशि लेने के बावजूद कनेक्शन नहीं दिए जाने का आरोप लगाते हुए आधा दर्जन लोगों ने 8 सितंबर को सेमरिया थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायतकर्ताओं ने तत्कालीन कनिष्ठ यंत्री प्रकाशचंद्र निगम सहित संबंधित कर्मचारियों पर कनेक्शन के नाम पर राशि लेने के आरोप लगाए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि उनसे आवश्यक दस्तावेज लिए गए और कनेक्शन के लिए पैसे भी जमा कराए गए, लेकिन कई मामलों में न तो विधिवत रसीद दी गई और न ही बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया पूरी की गई।
चूल्ही निवासी सतेन्द्र कुमार साहू के अनुसार उन्होंने 24 जुलाई को दुकान के लिए बिजली कनेक्शन का आवेदन दिया था। उनका आरोप है कि उनसे ₹4,500 लिए गए और मीटर भी लगा दिया गया, लेकिन अब तक आईवीआरएस क्रमांक नहीं मिला। कार्यालय में संपर्क करने पर दोबारा शुल्क जमा करने की बात कही जा रही है।
वहीं सेमरिया-रामगढ़ निवासी सुधीर कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि कनेक्शन के नाम पर ₹3,500 विभागीय कर्मचारी बृजलाल साकेत के फोन-पे खाते में जमा कराए गए, लेकिन अब तक कनेक्शन नहीं मिला। शिकायत करने पर तत्कालीन जेई द्वारा फोन पर अभद्र व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
इन उपभोक्ताओं से राशि लेने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार सुधीर कुमार सिंह से ₹3,500, दशरथ साहू से ₹3,500, राहुल साहू से ₹3,500, रुपनारायण तिवारी से ₹3,400, प्रमोद मिश्रा से ₹50,000 और सतेन्द्र कुमार साहू से ₹4,500 लिए जाने का आरोप है।
50 से ज्यादा पीड़ित होने का दावा
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यह मामला केवल आधा दर्जन लोगों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार सेमरिया क्षेत्र में ऐसे कई अन्य उपभोक्ता भी हैं, जिन्होंने कनेक्शन के नाम पर राशि जमा की, लेकिन उन्हें अब तक वैध बिजली कनेक्शन नहीं मिला। पीड़ितों की संख्या 50 से अधिक होने की संभावना जताई गई है और प्रभावित उपभोक्ताओं की सूची तैयार किए जाने की बात कही गई है।
मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और जमा की गई राशि वापस कराने की मांग की है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। अब सवाल यह है कि अगर निर्धारित शुल्क जमा कराया गया था तो उसकी विधिवत रसीद क्यों नहीं दी गई और राशि लेने के बाद कनेक्शन की प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हुई?
