विकास की परियोजना, लेकिन विस्थापितों के हिस्से में इंतज़ार और इंसाफ की जद्दोजहद!
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JOURNALIST SURAJ KUMAR SIHAWAL
चितरंगी के ग्राम झोंखो में ललितपुर–सिंगरौली रेलवे लाइन से प्रभावित किसानों और आम परिवारों का आक्रोश अब आंदोलन का स्वरूप ले चुका है। भूमि, मकान और परिसंपत्तियों के समुचित एवं न्यायोचित मुआवजे की मांग को लेकर प्रभावित परिवार क्रमिक धरने पर हैं और शासन-प्रशासन से अपने अधिकारों की गुहार लगा रहे हैं।
एक ओर सत्तारूढ़ सरकार विकास की विराट गाथा और अधोसंरचना के विस्तार का दंभ भर रही है, वहीं दूसरी ओर उसी विकास की परिधि में आने वाले किसान अपने हक, मुआवजे और इंसाफ के लिए धरने पर बैठने को विवश हैं। सवाल महज मुआवजे का नहीं, बल्कि न्याय, संवेदना और शासन की जवाबदेही का है।
इसी बीच मध्य प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री एवं CWC सदस्य कमलेश्वर पटेल ग्राम झोंखो पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से संवाद कर उनकी पीड़ा सुनी और उनके अधिकारों की इस जद्दोजहद में पूरी मजबूती के साथ साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया।
कमलेश्वर पटेल ने एसडीएम चितरंगी से दूरभाष पर संवाद कर प्रभावित परिवारों के समस्त प्रकरणों का परीक्षण कराने तथा नियमानुसार न्यायोचित मुआवजा दिलाने हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास के नाम पर विस्थापितों के अधिकारों का परित्याग स्वीकार्य नहीं होगा। परियोजनाएं जनहित की वाहक तभी कहलाएंगी, जब उनकी बुनियाद में प्रभावित परिवारों के अधिकार, सम्मान और न्याय भी सुरक्षित हों।
अब प्रश्न शासन से है—जिन किसानों की भूमि विकास की परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई, क्या उन्हें अपने ही अधिकार के लिए धरना और संघर्ष करना पड़ेगा?
प्रभावित परिवारों को महज़ आश्वासन नहीं, न्यायोचित मुआवजा और समयबद्ध कार्रवाई चाहिए।
यह संघर्ष केवल भूमि का नहीं, अधिकार और अस्मिता का संघर्ष है—और जब तक प्रभावित परिवारों को उनका वाजिब हक नहीं मिलता, उनकी आवाज़ को बुलंद किया जाता रहेगा।
