लबालब पानी में डूबा मिट्टी परीक्षण केंद्र, किसानों को नहीं मिल रही जांच रिपोर्ट
मझौली में लाखों की लागत से बने केंद्र की बदहाली पर उठे सवाल, बारिश में भवन और उपकरणों को नुकसान का खतरा
सीधी। आधुनिक तकनीक के जरिए खेती को बढ़ावा देने और किसानों को खेत की मिट्टी की गुणवत्ता के आधार पर खाद एवं फसल चयन की सलाह देने के उद्देश्य से शासन द्वारा खंड स्तर पर मिट्टी परीक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के निर्माण और संचालन पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं। इसके बावजूद तहसील मुख्यालय मझौली में स्थापित मिट्टी परीक्षण केंद्र किसानों के लिए अपेक्षित उपयोगी साबित नहीं हो पा रहा है।
वर्तमान में बारिश के चलते केंद्र का परिसर पानी से लबालब भरा हुआ है। हालात ऐसे हैं कि भवन तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। परिसर में लगातार पानी जमा रहने से भवन की सुरक्षा के साथ-साथ अंदर रखे तकनीकी उपकरणों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है।
करीब एक दशक पहले बना भवन, फिर भी किसानों को नहीं मिल रहा लाभ
क्षेत्रीय किसानों के अनुसार मझौली में मिट्टी परीक्षण केंद्र का भवन करीब एक दशक पहले बनाया गया था। किसानों को उम्मीद थी कि यहां मिट्टी की जांच की सुविधा मिलने से खेत की उर्वरा क्षमता के अनुसार खाद का उपयोग और उपयुक्त फसल का चयन करने में मदद मिलेगी। लेकिन केंद्र का नियमित संचालन नहीं होने से किसानों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
किसानों का आरोप है कि मिट्टी के नमूने जमा कराने के बाद उन्हें समय पर जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई जाती। कई बार यह कहकर किसानों को वापस कर दिया जाता है कि नमूना बाहर भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद जानकारी दी जाएगी। इससे किसानों को अपनी जमीन की वास्तविक स्थिति और उसमें आवश्यक पोषक तत्वों की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती।
निर्माण स्थल को लेकर भी उठ रहे सवाल
मिट्टी परीक्षण केंद्र के भवन के निर्माण स्थल को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार भवन के एक ओर सड़क और पानी से भरा तालाब है, जबकि दूसरी ओर विद्यालय तथा अन्य दिशाओं में किसानों के खेत हैं।
बताया जाता है कि भवन निर्माण वाले स्थान पर पहले से करीब चार से पांच फीट गहराई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण से पहले आवश्यक भूमि समतलीकरण और मिट्टी भराव का काम पर्याप्त रूप से नहीं कराया गया। यही वजह बताई जा रही है कि बारिश के दौरान परिसर में बड़े पैमाने पर पानी जमा हो जाता है और स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि भवन के किवाड़ तक खोलना मुश्किल हो जाता है।
किसानों ने नियमित संचालन और जांच रिपोर्ट की मांग उठाई
किसानों का कहना है कि केवल भवन का निर्माण और कर्मचारी की तैनाती पर्याप्त नहीं है। केंद्र का नियमित संचालन, मिट्टी के नमूनों की समय पर जांच और किसानों को जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाना चाहिए, तभी शासन की मंशा के अनुरूप मिट्टी परीक्षण योजना का लाभ किसानों तक पहुंच सकेगा।
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के जिला उपाध्यक्ष द्वारिका प्रसाद बैस ने कहा कि केवल भवन बनाने और कर्मचारी तैनात कर देने से किसानों को मिट्टी परीक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। केंद्र का नियमित एवं नियमानुसार संचालन सुनिश्चित किया जाना जरूरी है, ताकि किसानों को समय पर मिट्टी की जांच रिपोर्ट मिल सके और वे वैज्ञानिक तरीके से खेती कर सकें।
अब सवाल यह है कि लाखों रुपये की लागत से तैयार किए गए इस केंद्र का नियमित संचालन कब शुरू होगा और बारिश के पानी से घिरे इस भवन एवं उपकरणों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विभाग कब ठोस कदम उठाएगा?
